Thursday, 17 January 2019

what is hormone therapy for cancer

  Hormone therapy can treat some types of cancer, including prostate cancer and breast cancer, by taking advantage of the disease's dependence on hormones to grow.
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Hormone therapy works by either stopping the body from producing hormones or interfering with how hormones affect the body.

Hormone therapy to treat breast cancer, or anti-estrogen therapy, focuses on lowering estrogen levels.

The treatment may involve surgical procedures, such as removal of the ovaries, or medications that interrupt signals from the pituitary gland, a gland that stimulates estrogen production.

Hormone therapy to treat prostate cancer, or androgen-suppression therapy, lowers testosterone and dihydrotestosterone (DHT) production.

 Treatments include surgical procedures to remove one or both testicles and medications that prevent the production of testosterone and DHT.

Advantages of hormone therapy

Advantages of hormone therapy include:

effective treatment for preventing the spread of cancer to other parts of the bodycan help reduce the risk of cancer returning after surgery

Disadvantages of hormone therapy

There are some disadvantages to this type of treatment, such as:

only works on cancers that require hormones to growside effects for females include headaches, hot flashes, weight gain.
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Sunday, 13 January 2019

eyesight improving with age | उम्र के साथ आंखों सुधार

               
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 eyesight improving with age
  उम्र के साथ दृष्टि में सुधार

★★★ सुंदर आंखें इंसान की सुंदरता में चार चांद लगाती हैं क्योंकि इन्हीं अनमोल आखों से वह कुदरत के खूबसूरत नजारों को देख पाता है। 

2.इसीलिए जरूरी है आंखों को बीमारियों से बचाना। आंखों को बीमारियों से बचाने के लिए आंखों की सफाई और आंखों का व्या‍याम करना जरूरी है। 

3.आंखों की देखभाल के लिए विटामिन-ए युक्त भोजन भी करना चाहिए जो आंखों की रोशनी तेज करता है और आंखों की समस्याओं से व्यक्ति को बचाता है। आइए जानें आंखों की सेहत के नुस्खों के बारे में। 

4.आंखों के प्रति लापरवाही बरतने से आंखों से पानी आना, जलन, खुजली, आंखों का लाल होना, पीलापन आना, सूजना, धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

5.इन समस्याओं से आंखों को बचाने के लिए नियमित रूप से आंखों की सफाई करनी चाहिए। इसके लिए आप आंखों को दिन में 3-4 बार ठंडे पानी से अच्छीं तरह से धोएं।

6.आंखों में थकान होने पर गुलाब जल में रूई भिगोकर आंखों पर रखने से आंखों को राहत मिलती है।

7.आंखों में दर्द होने पर दोनों हथेलियों को रगड़कर कुछ देर आंखों पर मलना अच्छा रहता है।

8.आंखों को बीमारी से बचाने के लिए विटामिन-ए युक्त भोजन जैसे दूध, मक्खन, गाजर, टमाटर, पपीता, अंडे, शुद्ध घी और हरी साग-सब्जियों इत्यादि का सेवन करना चाहिए।

9.आंखों में कोई समस्या, हो या न हो लेकिन समय-समय पर आंखों का चेकअप कराना चाहिए।
आंखों को आराम देने के लिए पर्याप्त आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए।

10.आंखों के आसपास की त्वचा को पुष्ट करने के लिए बादाम के तेल से आंखों के नीचे हल्कें हाथ से मालिश करनी चाहिए। इससे आंखों के नीचे काले घेरे भी दूर होते हैं।

11.आंखों को धूल-मिट्टी और धूप से बचाने के लिए बाहर निकलते समय आंखों पर शेड्स या चश्में का इस्तेमाल करना चाहिए।

12.आंखों की सेहत के लिए जरूरी है कि उचित प्रकाश में ही बैठकर काम किया जाएं, फिर चाहे आप कंप्यूटर पर काम कर रहे हो या फिर पढ़ाई।

13.आंखों के मेकअप के लिए अच्छी क्वालिटी के उत्पादों का ही इस्तेमाल करें।

14.बहुत नजदीक से निरंतर किसी चीज को देखने या ज्यादा देर तक कम्यूटर के सामने बैठने के कारण आंखों में दर्द की शिकायत हो सकती है। इसलिए निरंतर आंखों पर जोर न डालें। बीच-बीच में अवकाश लेते रहें।

15.डायबिटीज के रोगियों को समय-समय पर आंखों का चेकअप जरूर करवाना चाहिए क्योंकि डायबिटीज से 

16.आंखों पर नकारात्मक असर पड़ता है और लंबे समय तक डायबिटीज़ रहने पर अंधापन भी हो सकता है।

17.आंखों के नीचे एंटी रिंकल क्रीम लगानी चाहिए। एंटी रिंकल क्रीम में मौजूद तत्व होते है विटामिन सी और ग्रीन टी ,जो आंखों के काले घेरे बनने से रोकने में लाभकारी है।

18.आंखों पर जरूरत के हिसाब से मेकअप करना चाहिए, यानी काजल, सुरमा जैसी चीजें लगाने से बचना चाहिए।

19.कंप्यूटर पर काम करते समय अपनी कुर्सी को कंप्यूटर की ऊंचाई के हिसाब से रखें। जिससे आंखों पर बहुत अधिक जोर न पड़े और टीवी कभी अंधेरे में न देखें, इससे आंखों पर बहुत जोर पड़ता है।

20. 
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diabetes | how to treat it |

आजकल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है। डायबिटीज भारत में 15 करोड 70 लाख कों है और 3 करोड लोगों को हो जाएगी अगले कुछ सालों में सरकार ये कह रही है । हर दो मिनट में एक मौत हो रही है

1.डायबिटीज से और क​म्प्लकेशन तो बहुत हो रहे है... किसी की किडनी खराब हो रही है, किसी का लीवर खराब हो रहा है किसी को ब्रेन हेमरेज हो रहा है, किसी को पैरालिसिस हो रहा है, किसी को ब्रेन स्ट्रोक आ रहा है, किसी को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है, किसी को हार्ट अटैक आ रहा है कम्प्लकेशन बहुत है खतरनाक है 

2.मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। रक्त ग्लूकोज स्तर बढा़ हूँआ मिलता है, इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव के बढने के कारण ये रोग होता है। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है।

3.भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं। यह एक प्रकार की शर्करा होती है। ग्लूकोज रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। अग्नाशय ग्लूकोज उत्पन्न करता है इनसुलिन भी रक्तधारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है।

4.मधुमेह बीमारी का असली कारण जब तक आप लोग नही समझेगे आपकी मधुमेह कभी भी ठीक नही हो सकती है जब आपके रक्त में वसा (कोलेस्ट्रोल) की मात्रा बढ जाती है तब रक्त में मोजूद कोलेस्ट्रोल कोशिकाओ के चारों वो चिपक जाता है और     खून में मोजूद इन्सुलिन कोशिकाओं तक नही पहुँच पाता है (इंसुलिन की मात्रा तो पर्याप्त होती है किन्तु इससे रिसेप्टरों को खोला नहीं जा सकता है, अर्थात पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसेप्टरों की संख्या कम हो सकती है)

5.वो इन्सुलिन शरीर के किसी भी काम में नही आता है जिस कारण से शरीर में हमेशा शुगर का स्तर हमेशा ही बढा हुआ होता है जबकि जब हम बाहर से इन्सुलिन लेते है तब वो इन्सुलिन नया-नया होता है तो वह कोशिकाओं के अन्दर पहुँच जाता है  अब आप समझ गये होगे कि मधुमेह का रिश्ता कोलेस्ट्रोल से है न कि शुगर से.

6.मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रोगी का वजन कम होता जाता है।

7.शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता। तो  ऐसी स्थिति में हम क्या करें?

8.एक छोटी सी सलाह है कि आप इन्सुलिन पर ज्यादा निर्भर ना करे क्योंकि यह इन्सुलिन डायबिटीज से भी ज्यादा खतरनाक है, साइड इफेक्ट्स बहुत है इसके । इस बीमारी के घरेलू उपचार निम्न लिखित हैं।
9.आयुर्वेद की एक दवा है जो आप घर में भी बना सकते है – -  100 ग्राम मेथी का दाना - 100 ग्राम करेले के बीज -  150 ग्राम जामुन के बीज -  250 ग्राम बेल के पत्ते (जो शिव जी को चढाते है )

10.इन सबको धुप में सुखाकर पत्थर में पिसकर पाउडर बना कर आपस में मिला ले यही औषधि है ।
11.औषधि लेने की पद्धति : सुबह नास्ता करने से एक घंटे पहले एक चम्मच गरम पानी के साथ ले, फिर शाम को खाना खाने से एक घंटे पहले ले। तो सुबह शाम एक एक चम्मच पाउडर खाना खाने से पहले गरम पानी के साथ आपको लेना है ।

12.देड दो महीने अगर आप ये दवा ले लिया । ये औषधि बनाने में   20 से 25 रूपया खर्च आएगा और ये औषधि तीन महिने तक चलेगी और उतने दिनां में आपकी सुगर ठीक हो जाएगी । सावधानी

13.सुगर के रोगी ऐसी चीजे ज्यादा खाए जिसमे फाइबर हो रेशे ज्यादा हो, High Fiber Low Fat Diet घी तेल वाली डायेट कम हो और फाइबर वाली ज्यादा हो रेशेदार चीजे ज्यादा  खाए।

14.सब्जिया में बहुत रेशे है वो खाए, डाल जो छिलके वाली हो वो खाए, मोटा अनाज ज्यादा खाए, फल ऐसी खाए जिनमे रेशा बहुत है । - 

15.चीनी कभी ना खाए, डायबिटीज की बीमारी को ठीक होने में चीनी सबसे बडी रुकावट है। लेकिन आप गुड खा सकते है ।
दूध और दूध से बनी कोई भी चीज नही खाना । -  प्रेशर कुकर और अलुमिनम के बर्तन में  खाना ना बनाए
  
रात का खाना सर्यास्त के पूर्व करना होगा ।

जो डायबिटीज आनुवंशिक होतें है वो कभी पूरे ठीक नही होते उनका शुगर सिर्फ कण्ट्रोल होता है उनको ये दवा पूरी जिन्दगी खानी पडेगी, पर जिनको आनुवंशिक नही है उनका पूरा ठीक होता है
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correct order of eating food

सूम्पर्ण सेहत बिना डाक्टर-एक सपना या हकीकत? आज भारत में लगभग 80% लोग रोगी हैं, पर इन सभी बीमारियों के इलाज  के  लिए पर्याप्त चिकित्सक नहीं हैं। आज से 3000 वर्ष पूर्व महर्षि बागभट्ट द्वारा  रचित अष्टांग हृदयं के अनुसार, बीमार व्यक्ति ही अपना सबसे अच्छा चिकित्सक हो सकता है, बीमारियों से मुक्त रहने के लिए दैनिक आहार विहार द्वारा स्वस्थ रहने के सूत्रों के आधार पर हम ने  निम्न सूत्र बनाए हैं
1.रात को दाँत साफ करके सोये।

2.सुबह उठ कर गुनगुना पानी बिना कुर्ला किए, बैठ कर, घूंट – घूंट (sip-sip) करके पीये। एक दो गिलास जितना आप सुविधा से पी सकें ।
3.भोजनान्ते विषमबारी अर्थात भोजन के अंत में पानी पीना विष पीने के समान है। इस लिए खाना खाने से आधा घंटा पहले और डेढ घंटा बाद तक पानी नहीं पीना। डेढ घंटे बाद पानी जरूर पीना।
4.पानी के विकल्प में आप सुबह के भोजन के बाद मौसमी के फलों का ताजा रस पी सकते हैं (डिब्बे वाला नहीं),
5.दोपहर के भोजन के बाद छाछ और अगर आप हृदय रोगी नहीं हैं तो आप दहीं की लस्सी भी पी सकते हैं।
6. शाम के भोजन के बाद गर्म दूध। यह  आवश्यक है कि इन चीजो का क्रम उलट-पुलट मत करें।
7.पानी जब भी पीये बैठ कर पीये और घूंट – घूंट कर पीये।
8.फ्रिज (रेफ्रीजिरेटर) का पानी कभी ना पीये। गर्मी के दिनों में मिट्ठी के घडे का पानी पी सकते हैं।सुबह का भोजन सर्योदय के दो से तीन घंटे के अन्दर खा लेना चाहिए। आप अपने शहर में सर्योदय का समय देख लें और फिर भोजन का समय निश्चित कर लें।
9.सुबह का भोजन पेट भर कर खाएं। अपना मनपसंद खाना सुबह पेट भर कर खाएं।
10.दोपहर का भोजन सुबह के भोजन से एक तिहाई कम करके खाएं, जैसे सुबह अगर आप तीन रोटी खाते हैं तो दोपहर को दो खाएं। दोपहर का भोजन करने के तुरंत बाद बाई करवट (Left Side) लेट जाएँ, चाहे तो नींद भी ले सकते हैं, मगर कम से कम 20 मिनट अधिक से अधिक 40 मिनट। 40 मिनट से ज्यादा नहीं।
11.इसके विपरीत शाम को भोजन के तुरंत बाद नहीं सोना। भोजन के बाद कम से कम 500 कदम जरूर सैर करें । संभव हो तो रात का खाना सर्यास्त से पहले खा लें।
12.भोजन बनाने में फ्रिज, माइक्रोवेव ओवन, प्रैशर कूकर, तथा एल्युमिनियम के बर्तनां का प्रयोग ना करें।
13.खाने में रिफाइन्ड तेल का इस्तेमाल ना करें। आप जिस क्षेत्र में रहते हैं वहाँ जो तेल के बीज उगाये जाते हैं उसका शुद्ध तेल प्रयोग करें, जैसे यदि आपके क्षेत्र में सरसों ज्यादा होती है तो सरसों का तेल, मुंगफली होती है तो मुंगफली का तेल, नारियल है तो नारियल का तेल। तेल सीधे सीधे घानी से निकला हुआ होना चाहिए।
14.खाने में हमेशा सेंधा नमक का ही प्रयोग करना चाहिए, ना की आयोडिन युक्त नमक का।
15.चीनी की जगह गुड, शक्कर, देसी खाण्ड या धागे वाली मिस्री का प्रयोग कर सकते है।कोई भी नशा ना करें, चाय, काफी, मांसाहार, मैदा, बेकरी उत्पादों का उपयोग नहीं करना चाहिए।रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध दाँत साफ करने के बाद पिये।सोने के समय सिर पूर्व दिशा की तरफ कर के सोये।
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